Muscular System

पेशी तंत्र (Muscular System)

पेशी तंत्र (Muscular System) मानव शरीर का एक महत्वपूर्ण तंत्र है जो शरीर को गति और शक्ति प्रदान करता है। यह तंत्र विभिन्न प्रकार की पेशियों से मिलकर बना होता है जो हड्डियों से जुड़े होते हैं और उनके माध्यम से विभिन्न कार्य करते हैं।

पेशी तंत्र के प्रकार

पेशियों को तीन मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:

1.धारीदार पेशियाँ (Striated Muscles)

-संरचना: ये पेशियाँ लंबी, धारीदार (striated), और बहु-नाभिकीय (multinucleated) होती हैं।
-कार्य: ये स्वेच्छिक (voluntary) पेशियाँ होती हैं, जो हमारे इच्‍छा अनुसार संकुचित (contract) होती हैं। ये हड्डियों से जुड़ी होती हैं और शरीर की गति, चलना, दौड़ना, उठाना आदि कार्यों में मदद करती हैं।
उदाहरण: बाइसेप्स, ट्राइसेप्स, क्वाड्रिसेप्स।

2.हृदय पेशियाँ (Cardiac Muscles):

-संरचना: ये पेशियाँ धारीदार (striated) और एकल-नाभिकीय (single-nucleated) होती हैं, और इनका स्वरूप शाखाओं (branched) के समान होता है।
-कार्य: ये अनैच्छिक (involuntary) पेशियाँ होती हैं, जो हमारे नियंत्रण के बिना संकुचित होती हैं। ये केवल हृदय में पाई जाती हैं और हृदय की धड़कन को नियंत्रित करती हैं।
उदाहरण: हृदय की पेशियाँ।

3.मुलायम पेशियाँ (Smooth Muscles):

-संरचना: ये पेशियाँ अनधारी (non-striated) और एकल-नाभिकीय (single-nucleated) होती हैं।
-कार्य: ये अनैच्छिक (involuntary) पेशियाँ होती हैं, जो आंतरिक अंगों, रक्त वाहिकाओं, और पाचन तंत्र की दीवारों में पाई जाती हैं। ये पेशियाँ आंतरिक अंगों की गति और संचालन को नियंत्रित करती हैं।
उदाहरण: आँतों की पेशियाँ, रक्त वाहिकाओं की पेशियाँ।

पेशियों का कार्य

-गति (Movement): कंकालीय पेशियाँ हड्डियों के साथ मिलकर शरीर के विभिन्न हिस्सों की गति को नियंत्रित करती हैं।
-रचना और स्थिरता (Posture and Stability): ये पेशियाँ शरीर को स्थिरता और मुद्रा बनाए रखने में मदद करती हैं।
-अंगों की सुरक्षा (Protection of Organs): मुलायम पेशियाँ आंतरिक अंगों की सुरक्षा करती हैं।
-ऊष्मा उत्पादन (Heat Production): पेशियों के संकुचन से उत्पन्न ऊर्जा शरीर को गर्म रखने में मदद करती है।
-रक्त संचार (Blood Circulation): हृदय पेशियाँ रक्त को पूरे शरीर में पंप करती हैं।

पेशियों का संकुचन

-पेशियों का संकुचन एक जटिल प्रक्रिया है, जो न्यूरॉन्स (neurons) के संकेतों द्वारा नियंत्रित होती है। इस प्रक्रिया में निम्नलिखित कदम शामिल होते हैं:

-संकेतन (Signaling): मस्तिष्क से संकेत न्यूरॉन्स के माध्यम से पेशियों तक पहुँचता है।
-रासायनिक प्रतिक्रिया (Chemical Reaction): न्यूरोट्रांसमीटर (neurotransmitters) जैसे एसीटिलकोलाइन (acetylcholine) जारी होते हैं।
-कैल्शियम रिलीज (Calcium Release): कैल्शियम आयन (ions) जारी होते हैं और पेशियों के अंदरूनी तंतु (fibers) को सक्रिय करते हैं।
-संकुचन (Contraction): एक्टिन (actin) और मयोसिन (myosin) तंतु आपस में जुड़कर पेशी का संकुचन करते हैं।

पेशी तंत्र के रोग

-मांसपेशियों की कमजोरी (Muscular Dystrophy): यह एक अनुवांशिक रोग है जिसमें मांसपेशियों की शक्ति कम हो जाती है।
-मायस्थेनिया ग्रेविस (Myasthenia Gravis): यह एक ऑटोइम्यून रोग है जिसमें मांसपेशियों की थकान और कमजोरी होती है।
-मांसपेशियों का खिंचाव (Muscle Strain): अधिक व्यायाम या चोट के कारण मांसपेशियों में खिंचाव या टूट-फूट हो सकती है।

संक्षेप

पेशी तंत्र मानव शरीर को गति, स्थिरता, और शक्ति प्रदान करता है। यह तंत्र तीन मुख्य प्रकार की पेशियों से बना होता है: कंकालीय पेशियाँ, हृदय पेशियाँ, और मुलायम पेशियाँ। इन पेशियों के कार्यों में गति, रचना और स्थिरता, अंगों की सुरक्षा, ऊष्मा उत्पादन, और रक्त संचार शामिल हैं। पेशियों का संकुचन न्यूरॉन्स के संकेतों द्वारा नियंत्रित होता है। पेशी तंत्र के विभिन्न रोग मांसपेशियों की कमजोरी, थकान, और खिंचाव का कारण बन सकते हैं।

धारीदार पेशियाँ (Striated Muscles)

धारीदार पेशियाँ (Striated Muscles), जिन्हें कंकालीय पेशियाँ (Skeletal Muscles) भी कहा जाता है, मानव शरीर की सबसे अधिक संख्या में पाई जाने वाली पेशियाँ हैं। ये पेशियाँ शरीर की हड्डियों से जुड़ी होती हैं और इनका मुख्य कार्य शरीर को गति प्रदान करना है।

विशेषताएँ
-धारीदार संरचना (Striated Structure): इन्हें धारीदार पेशियाँ कहा जाता है क्योंकि माइक्रोस्कोप के नीचे देखने पर इनमें हल्की और -गहरी धारियाँ (stripes) दिखाई देती हैं। ये धारियाँ एक्टिन (actin) और मयोसिन (myosin) तंतु के नियमित विन्यास के कारण होती हैं।
-बहु-नाभिकीय (Multinucleated): ये पेशियाँ बहु-नाभिकीय होती हैं, यानी एक पेशी कोशिका में कई नाभिक होते हैं।
-लंबी और सिलेंडर जैसी (Long and Cylindrical): इनकी आकृति लंबी और सिलेंडर जैसी होती है।
-स्वेच्छिक नियंत्रण (Voluntary Control): ये पेशियाँ स्वेच्छिक होती हैं, यानी इन्हें हम अपनी इच्छा अनुसार संकुचित (contract) और शिथिल (relax) कर सकते हैं।

कार्य

-गति प्रदान करना (Movement): ये पेशियाँ हड्डियों से जुड़कर शरीर को गति प्रदान करती हैं। जैसे चलना, दौड़ना, लिखना, उठाना आदि।
-स्थिरता (Stability): ये पेशियाँ शरीर की स्थिरता और मुद्रा बनाए रखने में मदद करती हैं।
-ऊष्मा उत्पादन (Heat Production): पेशियों के संकुचन से उत्पन्न ऊर्जा शरीर को गर्म रखने में मदद करती है।
-संतुलन (Balance): शरीर के संतुलन को बनाए रखने में मदद करती हैं।

संरचना

-धारीदार पेशियाँ कई पेशी तंतुओं (muscle fibers) से मिलकर बनी होती हैं। प्रत्येक पेशी तंतु कई मायोफिब्रिल (myofibrils) से बना होता है, जो एक्टिन और मयोसिन तंतुओं से मिलकर बनते हैं। ये मायोफिब्रिल पेशी तंतु के अंदर समानांतर पंक्तियों में व्यवस्थित होते हैं।

संकुचन की प्रक्रिया

पेशी संकुचन एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं:

-न्यूरॉन्स से संकेत (Signal from Neurons): मस्तिष्क से संकेत न्यूरॉन्स के माध्यम से पेशी तक पहुँचता है।
-रासायनिक प्रतिक्रिया (Chemical Reaction): न्यूरोट्रांसमीटर (जैसे एसीटिलकोलाइन) जारी होते हैं।
-कैल्शियम रिलीज (Calcium Release): कैल्शियम आयन जारी होते हैं और मायोफिब्रिल में प्रवेश करते हैं।
-संकुचन (Contraction): एक्टिन और मयोसिन तंतु आपस में जुड़ते हैं, जिससे पेशी संकुचित होती है।

धारीदार पेशियों के उदाहरण

-बाइसेप्स (Biceps): यह ऊपरी बांह में पाई जाने वाली प्रमुख पेशी है।
-ट्राइसेप्स (Triceps): यह ऊपरी बांह के पीछे की तरफ पाई जाने वाली पेशी है।
-डेल्टॉइड (Deltoid): यह कंधे की पेशी है।
-क्वाड्रिसेप्स (Quadriceps): यह जांघ की सामने की पेशियाँ हैं।
-हैमस्ट्रिंग्स (Hamstrings): यह जांघ की पिछली पेशियाँ हैं।

संक्षेप

धारीदार पेशियाँ मानव शरीर की सबसे अधिक संख्या में पाई जाने वाली और महत्वपूर्ण पेशियाँ हैं। ये पेशियाँ शरीर को गति, स्थिरता, और संतुलन प्रदान करती हैं। इनकी धारीदार संरचना, बहु-नाभिकीयता, और लंबी सिलेंडर जैसी आकृति होती है। ये पेशियाँ स्वेच्छिक नियंत्रण में होती हैं और हड्डियों से जुड़ी होती हैं। इनका संकुचन एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें न्यूरॉन्स के संकेत, रासायनिक प्रतिक्रिया, और कैल्शियम की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

अनधारी पेशियाँ (Unstriated Muscles)

अनधारी पेशियाँ (Unstriated Muscles), जिन्हें मुलायम पेशियाँ (Smooth Muscles) भी कहा जाता है, मानव शरीर के विभिन्न आंतरिक अंगों की दीवारों में पाई जाती हैं। ये पेशियाँ अनैच्छिक होती हैं, यानी हम इन्हें अपनी इच्छा से नियंत्रित नहीं कर सकते।

विशेषताएँ

-अनधारी संरचना (Non-striated Structure): माइक्रोस्कोप के नीचे देखने पर इनमें कोई धारियाँ (stripes) नहीं होती हैं, इसलिए इन्हें अनधारी पेशियाँ कहा जाता है।
-एकल-नाभिकीय (Uninucleated): प्रत्येक पेशी कोशिका में एक ही नाभिक (nucleus) होता है।
-धारियों का अभाव (Absence of Striations): इन पेशियों में एक्टिन (actin) और मयोसिन (myosin) तंतु धारीदार रूप में व्यवस्थित नहीं होते हैं।
-अनैच्छिक नियंत्रण (Involuntary Control): ये पेशियाँ हमारे नियंत्रण के बिना संकुचित (contract) और शिथिल (relax) होती हैं।
कार्य
-आंतरिक अंगों की गति (Movement of Internal Organs): ये पेशियाँ आंतरिक अंगों की गति को नियंत्रित करती हैं, जैसे आँतों में भोजन का संचालन (peristalsis), मूत्राशय में मूत्र का प्रवाह, और रक्त वाहिकाओं में रक्त का संचार।
-रक्तचाप नियंत्रण (Regulation of Blood Pressure): ये पेशियाँ रक्त वाहिकाओं की दीवारों में संकुचन और शिथिलता द्वारा रक्तचाप को नियंत्रित करती हैं।
-स्फिंक्टर नियंत्रण (Sphincter Control): ये पेशियाँ विभिन्न स्फिंक्टरों (sphincters) को नियंत्रित करती हैं, जैसे मूत्राशय और गुदा के स्फिंक्टर।

संरचना

-अनधारी पेशियाँ छोटी, धागेदार (spindle-shaped) और एकल-नाभिकीय होती हैं। इन पेशियों के तंतु समांतर रूप में व्यवस्थित नहीं होते हैं, जिससे इन्हें धारीदार पेशियों जैसी धारियाँ नहीं होती हैं।

संकुचन की प्रक्रिया

अनधारी पेशियों का संकुचन एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं:

-न्यूरॉन्स से संकेत (Signal from Neurons): स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (autonomic nervous system) से संकेत पेशियों तक पहुँचता है।
-रासायनिक प्रतिक्रिया (Chemical Reaction): न्यूरोट्रांसमीटर (जैसे नॉरएपिनेफ्रिन) जारी होते हैं।
-कैल्शियम रिलीज (Calcium Release): कैल्शियम आयन जारी होते हैं और पेशी कोशिका में प्रवेश करते हैं।
-संकुचन (Contraction): एक्टिन और मयोसिन तंतु आपस में जुड़ते हैं, जिससे पेशी संकुचित होती है।

अनधारी पेशियों के उदाहरण

-पाचन तंत्र की पेशियाँ (Digestive System Muscles): ये आँतों की दीवारों में पाई जाती हैं और भोजन के संचालन में मदद करती हैं।
-मूत्राशय की पेशियाँ (Bladder Muscles): ये पेशियाँ मूत्राशय की दीवारों में पाई जाती हैं और मूत्र प्रवाह को नियंत्रित करती हैं।
-रक्त वाहिकाओं की पेशियाँ (Blood Vessel Muscles): ये पेशियाँ रक्त वाहिकाओं की दीवारों में पाई जाती हैं और रक्तचाप को नियंत्रित करती हैं।
-गर्भाशय की पेशियाँ (Uterine Muscles): ये पेशियाँ गर्भाशय की दीवारों में पाई जाती हैं और प्रसव के समय संकुचित होती हैं।

संक्षेप

अनधारी पेशियाँ मानव शरीर के विभिन्न आंतरिक अंगों की दीवारों में पाई जाती हैं और अनैच्छिक होती हैं। इनमें धारियों का अभाव होता है और प्रत्येक पेशी कोशिका में एक ही नाभिक होता है। ये पेशियाँ आंतरिक अंगों की गति, रक्तचाप नियंत्रण, और स्फिंक्टर नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनका संकुचन स्वायत्त तंत्रिका तंत्र के संकेतों द्वारा नियंत्रित होता है।

हृदय पेशियाँ (Cardiac Muscles)

हृदय पेशियाँ (Cardiac Muscles), जिन्हें कार्डियक मसल्स (Cardiac Muscles) भी कहा जाता है, विशेष प्रकार की पेशियाँ होती हैं जो केवल हृदय में पाई जाती हैं। ये पेशियाँ हृदय की धड़कन को नियंत्रित करती हैं और रक्त को पूरे शरीर में पंप करने में मदद करती हैं।

विशेषताएँ

-धारीदार संरचना (Striated Structure): ये पेशियाँ धारीदार होती हैं, यानी इनमें हल्की और गहरी धारियाँ (stripes) होती हैं, जैसे कंकालीय पेशियों में होती हैं।
-शाखायुक्त (Branched): ये पेशियाँ शाखायुक्त होती हैं और एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं।
-एकल-नाभिकीय (Uninucleated) या द्वि-नाभिकीय (Binucleated): इनमें एक या दो नाभिक हो सकते हैं।
-अनैच्छिक नियंत्रण (Involuntary Control): ये पेशियाँ अनैच्छिक होती हैं, यानी हम इन्हें अपनी इच्छा से नियंत्रित नहीं कर सकते।

कार्य

-रक्त का पंप करना (Pumping Blood): हृदय पेशियाँ संकुचित होकर रक्त को हृदय से बाहर धकेलती हैं और शरीर के विभिन्न हिस्सों में पहुँचाती हैं।
-रक्त प्रवाह बनाए रखना (Maintaining Blood Flow): ये पेशियाँ हृदय की नियमित धड़कन को बनाए रखती हैं, जिससे निरंतर रक्त प्रवाह सुनिश्चित होता है।
-ऑक्सीजन और पोषक तत्वों का वितरण (Distribution of Oxygen and Nutrients): रक्त के माध्यम से ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को शरीर के सभी हिस्सों में पहुँचाना।

संरचना

-हृदय पेशियाँ छोटी, धारीदार और शाखायुक्त होती हैं। इन पेशियों के तंतु इंटरकालेटेड डिस्क्स (intercalated discs) द्वारा जुड़े होते हैं, जो संचारण और संकुचन के दौरान समन्वय (coordination) में मदद करते हैं। इन डिस्क्स में गैप जंक्शन्स (gap junctions) और डेसमोजोम्स (desmosomes) होते हैं, जो पेशियों के तंतुओं को मजबूती से जोड़ते हैं।

संकुचन की प्रक्रिया

हृदय पेशियों का संकुचन स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (autonomic nervous system) और अंतःस्रावी प्रणाली (endocrine system) द्वारा नियंत्रित होता है। संकुचन की प्रक्रिया में निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं:

-सिनोट्रियल नोड (Sinoatrial Node) से संकेत (Signal from SA Node): हृदय के ऊपरी हिस्से में स्थित सिनोट्रियल नोड विद्युत संकेत उत्पन्न करता है।
-विद्युत संकेत का प्रसार (Propagation of Electrical Signal): यह संकेत हृदय की पेशियों में फैलता है और संकुचन की प्रक्रिया को शुरू करता है।
-कैल्शियम रिलीज (Calcium Release): विद्युत संकेत के कारण कैल्शियम आयन जारी होते हैं और पेशी तंतु सक्रिय होते हैं।
-संकुचन (Contraction): एक्टिन (actin) और मयोसिन (myosin) तंतु आपस में जुड़ते हैं, जिससे पेशी संकुचित होती है।

हृदय पेशियों के उदाहरण

हृदय के वेंट्रिकल (Ventricles) और एट्रिया (Atria): ये पेशियाँ हृदय के चार कक्षों (दो वेंट्रिकल और दो एट्रिया) में पाई जाती हैं और रक्त को पंप करने का कार्य करती हैं।

संक्षेप

हृदय पेशियाँ विशेष प्रकार की पेशियाँ हैं जो केवल हृदय में पाई जाती हैं और हृदय की धड़कन को नियंत्रित करती हैं। ये पेशियाँ धारीदार, शाखायुक्त, और अनैच्छिक होती हैं। इनका मुख्य कार्य रक्त को पंप करना और शरीर के विभिन्न हिस्सों में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को पहुँचाना है। हृदय पेशियों का संकुचन स्वायत्त तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी प्रणाली द्वारा नियंत्रित होता है।

पेशियों की संरचना (Structure of Muscles)

पेशियों की संरचना जटिल होती है और विभिन्न स्तरों पर विभाजित होती है। पेशियाँ कोशिकाओं के समूह से बनी होती हैं जो मिलकर संकुचन (contraction) और शिथिलन (relaxation) की प्रक्रिया को संभव बनाती हैं। पेशियों की संरचना को समझने के लिए हम इसे विभिन्न स्तरों पर विभाजित कर सकते हैं:

  1. पेशी (Muscle)

यह पेशियों की सबसे बाहरी इकाई होती है, जो विभिन्न पेशी तंतुओं (muscle fibers) से मिलकर बनी होती है। पेशी को बाहरी परत (epimysium) द्वारा घेरा जाता है।

  1. पेशी समूह (Fascicle)

प्रत्येक पेशी विभिन्न पेशी समूहों में विभाजित होती है, जिन्हें फासिसल (fascicle) कहा जाता है। फासिसल को परिमिसियम (perimysium) नामक संयोजी ऊतक (connective tissue) की परत द्वारा घेरा जाता है।

  1. पेशी तंतु (Muscle Fiber)

प्रत्येक फासिसल विभिन्न पेशी तंतुओं (muscle fibers) से बना होता है। पेशी तंतु लंबी, सिलेंडर जैसी कोशिकाएँ होती हैं, जिन्हें एंडोमिसियम (endomysium) नामक पतली संयोजी ऊतक की परत द्वारा घेरा जाता है। एक पेशी तंतु में कई मायोफिब्रिल (myofibrils) होते हैं।

  1. मायोफिब्रिल (Myofibril)

मायोफिब्रिल पेशी तंतु के अंदर छोटे, तंतु जैसे संरचनाएँ होती हैं, जो पेशी के संकुचन में मुख्य भूमिका निभाती हैं। प्रत्येक मायोफिब्रिल कई सारकोमियर (sarcomere) से बना होता है, जो संकुचन की इकाई (contractile unit) होती हैं।

  1. सारकोमियर (Sarcomere)

सारकोमियर पेशी की सबसे छोटी इकाई होती है जो संकुचन के लिए जिम्मेदार होती है। यह दो Z-लाइन (Z-lines) के बीच का क्षेत्र होता है। सारकोमियर में एक्टिन (actin) और मयोसिन (myosin) नामक तंतु होते हैं:

a.एक्टिन (Actin): पतले तंतु होते हैं जो Z-लाइन से जुड़े होते हैं।
b.मयोसिन (Myosin): मोटे तंतु होते हैं जो एक्टिन तंतुओं के साथ इंटरलॉकिंग (interlocking) करके संकुचन पैदा करते हैं।

पेशी तंतु की संरचना का संक्षिप्त विवरण:

1.सारकोलेमा (Sarcolemma): पेशी तंतु की बाहरी झिल्ली होती है।
2.सारकोप्लाज्म (Sarcoplasm): पेशी तंतु का सिटोप्लाज्म होता है, जिसमें माइटोकॉन्ड्रिया, ग्लाइकोजन और मायोग्लोबिन होते हैं।
3.टी-ट्यूब्यूल (T-Tubules): ये ट्यूब जैसे संरचनाएँ होती हैं जो सारकोलेमा से अंदर की ओर फैलती हैं और विद्युत संकेतों को मायोफिब्रिल तक पहुँचाती हैं।
4.सारकोप्लाज्मिक रेटिकुलम (Sarcoplasmic Reticulum): यह कैल्शियम आयनों को संग्रहित करता है और उन्हें संकुचन के समय रिलीज करता है।

पेशियों का संकुचन (Muscle Contraction)

पेशियों का संकुचन एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं:

1.सिग्नल का आगमन (Arrival of Signal): मस्तिष्क से विद्युत संकेत मोटर न्यूरॉन के माध्यम से पेशी तंतु तक पहुँचता है।
2.न्यूरोट्रांसमीटर का रिलीज (Release of Neurotransmitter): न्यूरॉन के अंत से एसीटिलकोलाइन (acetylcholine) रिलीज होता है, जो पेशी तंतु के सारकोलेमा पर रिसेप्टर्स से जुड़ता है।
3.एक्शन पोटेंशियल (Action Potential): एसीटिलकोलाइन के जुड़ने से पेशी तंतु में विद्युत संकेत उत्पन्न होता है, जो टी-ट्यूब्यूल के माध्यम से फैलता है।
4.कैल्शियम रिलीज (Calcium Release): सारकोप्लाज्मिक रेटिकुलम से कैल्शियम आयन रिलीज होते हैं और मायोफिब्रिल में प्रवेश करते हैं।
5.संकुचन की शुरुआत (Initiation of Contraction): कैल्शियम आयन एक्टिन और मयोसिन तंतुओं के साथ इंटरलॉकिंग करते हैं, जिससे संकुचन होता है।

संक्षेप

पेशियों की संरचना जटिल होती है और विभिन्न स्तरों पर विभाजित होती है। पेशियाँ पेशी तंतुओं, फासिसल, मायोफिब्रिल और सारकोमियर से बनी होती हैं। संकुचन की प्रक्रिया में न्यूरॉन से संकेत, न्यूरोट्रांसमीटर का रिलीज, एक्शन पोटेंशियल का निर्माण, कैल्शियम का रिलीज और एक्टिन-मयोसिन तंतुओं की इंटरलॉकिंग शामिल होती है। इस जटिल संरचना और प्रक्रिया के कारण पेशियाँ संकुचन और शिथिलन के माध्यम से विभिन्न कार्य कर पाती हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *