Animal Tissues

पशु ऊतक (Animal Tissues)

पशु ऊतक शरीर के विभिन्न कार्यों को पूरा करने के लिए विशेषीकृत कोशिकाओं का एक समूह होते हैं। पशु ऊतकों को चार प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है: उपकला ऊतक (Epithelial Tissue), संयोजी ऊतक (Connective Tissue), पेशी ऊतक (Muscle Tissue), और तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue)।

1. उपकला ऊतक (Epithelial Tissue)

  • संरचना: उपकला ऊतक की कोशिकाएँ निकटता से जुड़ी होती हैं और एक या अधिक परतों में व्यवस्थित होती हैं।
  • कार्य: सुरक्षा, अवशोषण, स्राव और संवेदन।
  • स्थान:
    • त्वचा (Skin)
    • आंतरिक अंगों की आंतरिक सतह (Internal Lining of Organs)
    • ग्रंथियाँ (Glands)

2. संयोजी ऊतक (Connective Tissue)

  • संरचना: इसमें विभिन्न प्रकार की कोशिकाएँ और इंटरसेल्युलर मैट्रिक्स होती है।
  • कार्य: संरचना प्रदान करना, अंगों को जोड़ना, समर्थन देना और संरक्षण।
  • स्थान:
    • हड्डियाँ (Bones)
    • रक्त (Blood)
    • उपास्थि (Cartilage)
    • वसा ऊतक (Adipose Tissue)
    • लिगामेंट्स और टेंडन्स (Ligaments and Tendons)

3. पेशी ऊतक (Muscle Tissue)

  • संरचना: पेशी ऊतक में लंबे, तंतु जैसे कोशिकाएँ होती हैं जो संकुचित और शिथिल हो सकती हैं।
  • कार्य: गति, बल उत्पन्न करना और स्थिति बनाए रखना।
  • प्रकार:
    • कंकाल पेशी (Skeletal Muscle): हड्डियों से जुड़ी होती है और स्वैच्छिक गति को नियंत्रित करती है।
    • हृदय पेशी (Cardiac Muscle): हृदय में पाई जाती है और अनैच्छिक गति को नियंत्रित करती है।
    • मुलायम पेशी (Smooth Muscle): आंतरिक अंगों में पाई जाती है और अनैच्छिक गति को नियंत्रित करती है।

4. तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue)

  • संरचना: इसमें न्यूरॉन्स (Neurons) और सहायक कोशिकाएँ (Glial Cells) होती हैं।
  • कार्य: संवेदी जानकारी का संग्रह, संसाधन और प्रतिक्रिया उत्पन्न करना।
  • स्थान:
    • मस्तिष्क (Brain)
    • रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord)
    • तंत्रिकाएँ (Nerves)

निष्कर्ष

पशु ऊतक शरीर की संरचना और कार्य के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। प्रत्येक ऊतक का विशिष्ट कार्य और संरचना होती है जो शरीर के विभिन्न कार्यों को सक्षम बनाती है। इन ऊतकों का सही संचालन शरीर के समुचित कार्य और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।

ऊतकों की सामान्य संरचना (General Structure of Tissues)

ऊतक (Tissue) कोशिकाओं का एक समूह होता है जो समान कार्य को पूरा करने के लिए एक साथ मिलकर काम करता है। ऊतकों को उनकी संरचना और कार्य के आधार पर विभिन्न प्रकारों में विभाजित किया जाता है। यहाँ हम ऊतकों की सामान्य संरचना और प्रकारों का विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं:

1. उपकला ऊतक (Epithelial Tissue)

संरचना:

  • कोशिकाओं की सघनता: उपकला ऊतकों की कोशिकाएँ एक-दूसरे के बहुत करीब होती हैं और उनकी बीच की जगह बहुत कम होती है।
  • परतें: यह ऊतक एक या अधिक परतों में व्यवस्थित होता है।
  • बेसमेंट मेम्ब्रेन: यह एक पतली, अकोशिकीय परत होती है जो उपकला ऊतक को इसके नीचे स्थित संयोजी ऊतक से अलग करती है।

प्रकार:

  • सरलीकृत उपकला (Simple Epithelium): एक परत वाली संरचना, जैसे कि छोटी आंत की आंतरिक सतह।
  • स्तरीकृत उपकला (Stratified Epithelium): कई परतों वाली संरचना, जैसे कि त्वचा की बाहरी परत।
  • घनाभ उपकला (Cuboidal Epithelium): क्यूब के आकार की कोशिकाएँ, जैसे कि गुर्दे की नलिकाओं में।
  • स्तंभक उपकला (Columnar Epithelium): लंबी और स्तंभ के आकार की कोशिकाएँ, जैसे कि आंतों की आंतरिक परत।
  • शूलयुक्त उपकला (Ciliated Epithelium): बाल जैसी संरचनाएँ (शूल) होती हैं, जैसे कि श्वसन मार्ग में।

2. संयोजी ऊतक (Connective Tissue)

संरचना:

  • कोशिकाएँ: विभिन्न प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं, जैसे कि फाइब्रॉब्लास्ट, मास्ट कोशिकाएँ, और मैक्रोफेज।
  • मैट्रिक्स: कोशिकाओं के बीच में विस्तृत इंटरसेल्युलर मैट्रिक्स होता है, जिसमें फाइबर और ग्राउंड सब्सटेंस होता है।

प्रकार:

  • साधारण संयोजी ऊतक (Loose Connective Tissue): लचीली संरचना, जैसे कि त्वचा के नीचे की परत।
  • घनत्व संयोजी ऊतक (Dense Connective Tissue): मजबूत और घनी संरचना, जैसे कि लिगामेंट और टेंडन।
  • एडिपोज ऊतक (Adipose Tissue): वसा संग्रह करने वाला ऊतक।
  • कार्टिलेज (Cartilage): लचीली लेकिन मजबूत संरचना, जैसे कि कान और नाक में।
  • हड्डी (Bone): कठोर और मजबूत संरचना, जो शरीर को संरचना और समर्थन प्रदान करती है।
  • रक्त (Blood): तरल संयोजी ऊतक, जो पोषक तत्वों और ऑक्सीजन का परिवहन करता है।

3. पेशी ऊतक (Muscle Tissue)

संरचना:

  • मायोफाइब्रिल्स: तंतु जैसी संरचनाएँ जो संकुचन और शिथिलता में मदद करती हैं।
  • मांसपेशी कोशिकाएँ: लंबी और तंतु जैसी कोशिकाएँ होती हैं, जिन्हें मांसपेशी तंतु (Muscle Fibers) कहा जाता है।

प्रकार:

  • कंकाल पेशी (Skeletal Muscle): स्वैच्छिक मांसपेशियाँ, जो हड्डियों से जुड़ी होती हैं।
  • हृदय पेशी (Cardiac Muscle): अनैच्छिक मांसपेशियाँ, जो केवल हृदय में पाई जाती हैं।
  • मुलायम पेशी (Smooth Muscle): अनैच्छिक मांसपेशियाँ, जो आंतरिक अंगों की दीवारों में पाई जाती हैं।

4. तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue)

संरचना:

  • न्यूरॉन्स: तंत्रिका कोशिकाएँ, जिनमें डेंड्राइट्स, अक्षतंतु (Axon) और कोशिका निकाय होता है।
  • ग्लियल कोशिकाएँ (Glial Cells): सहायक कोशिकाएँ, जो न्यूरॉन्स को समर्थन और पोषण प्रदान करती हैं।

कार्य:

  • संवेदी जानकारी का संग्रह: संवेदी रिसेप्टर्स से जानकारी संग्रहित करना।
  • संसाधन और प्रतिक्रिया: जानकारी को संसाधित करके उचित प्रतिक्रिया उत्पन्न करना।

उपकला ऊतक (Epithelial Tissue)

उपकला ऊतक (Epithelial Tissue) शरीर की सतहों को ढकने और आंतरिक अंगों की आंतरिक सतहों को ढकने वाला एक प्रमुख ऊतक है। यह ऊतक सुरक्षा, अवशोषण, स्राव, और संवेदी कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उपकला ऊतक की संरचना (Structure of Epithelial Tissue)

  1. कोशिकाओं की सघनता: उपकला ऊतक की कोशिकाएँ बहुत घनी होती हैं और एक-दूसरे के बहुत पास स्थित होती हैं।
  2. बेसमेंट मेम्ब्रेन: यह ऊतक बेसमेंट मेम्ब्रेन पर स्थित होता है, जो इसे इसके नीचे स्थित संयोजी ऊतक से अलग करता है।
  3. कोशिका आकृति: उपकला ऊतक की कोशिकाएँ विभिन्न आकार और संरचना में हो सकती हैं, जैसे कि चपटी, घनाकार, और स्तंभाकार।

उपकला ऊतक के प्रकार (Types of Epithelial Tissue)

  1. सरलीकृत उपकला (Simple Epithelium): इसमें एक ही परत की कोशिकाएँ होती हैं।
    • सरलीकृत शल्की उपकला (Simple Squamous Epithelium): चपटी और पतली कोशिकाएँ, जैसे कि रक्त वाहिकाओं की आंतरिक सतह।
    • सरलीकृत घनाभ उपकला (Simple Cuboidal Epithelium): घनाकार कोशिकाएँ, जैसे कि गुर्दे की नलिकाओं में।
    • सरलीकृत स्तंभक उपकला (Simple Columnar Epithelium): स्तंभाकार कोशिकाएँ, जैसे कि आंत की आंतरिक सतह।
  2. स्तरीकृत उपकला (Stratified Epithelium): इसमें कई परतों की कोशिकाएँ होती हैं।
    • स्तरीकृत शल्की उपकला (Stratified Squamous Epithelium): बाहरी परत चपटी होती है, जैसे कि त्वचा की बाहरी सतह।
    • स्तरीकृत घनाभ उपकला (Stratified Cuboidal Epithelium): बाहरी परत घनाकार होती है, जैसे कि बड़ी ग्रंथियों की नलिकाएँ।
    • स्तरीकृत स्तंभक उपकला (Stratified Columnar Epithelium): बाहरी परत स्तंभाकार होती है, जो कम आम होती है।
  3. शूलयुक्त उपकला (Ciliated Epithelium): इस उपकला में बाल जैसी संरचनाएँ (शूल) होती हैं, जो पदार्थों के प्रवाह में मदद करती हैं।
    • शूलयुक्त स्तंभक उपकला (Ciliated Columnar Epithelium): स्तंभाकार कोशिकाएँ, जैसे कि श्वसन मार्ग में।
  4. सांतरणीय उपकला (Transitional Epithelium): यह उपकला खिंचाव और संकुचन में सक्षम होता है, जैसे कि मूत्राशय की आंतरिक सतह।

उपकला ऊतक के कार्य (Functions of Epithelial Tissue)

  1. सुरक्षा (Protection): उपकला ऊतक शरीर की बाहरी सतह को ढकता है और आंतरिक अंगों को यांत्रिक, रासायनिक, और जैविक हानियों से बचाता है।
  2. अवशोषण (Absorption): आंत की उपकला कोशिकाएँ पोषक तत्वों और अन्य आवश्यक पदार्थों का अवशोषण करती हैं।
  3. स्राव (Secretion): ग्रंथियों की उपकला कोशिकाएँ हार्मोन्स, एंजाइम्स, और अन्य पदार्थों का स्राव करती हैं।
  4. संवेदना (Sensation): कुछ उपकला ऊतक संवेदी रिसेप्टर्स के रूप में कार्य करते हैं और संवेदी जानकारी का संग्रह करते हैं।

उपकला ऊतक के स्थान (Locations of Epithelial Tissue)

  1. त्वचा (Skin): बाहरी सतह पर, सुरक्षा प्रदान करती है।
  2. आंतरिक अंगों की आंतरिक सतह (Internal Linings of Organs): जैसे कि आंत, गुर्दे, और फेफड़ों की आंतरिक सतह।
  3. ग्रंथियाँ (Glands): हार्मोन्स और अन्य पदार्थों का स्राव करती हैं।
  4. रक्त वाहिकाएँ (Blood Vessels): आंतरिक सतह पर, पदार्थों का आदान-प्रदान करती हैं।

आवरण उपकला (Covering Epithelium)

आवरण उपकला (Covering Epithelium) उपकला ऊतक का एक प्रकार है जो शरीर की बाहरी सतहों को ढकता है और आंतरिक अंगों की आंतरिक सतहों को भी कवर करता है। यह ऊतक शरीर को बाहरी क्षति, रोगाणुओं, और अन्य हानिकारक तत्वों से बचाता है और कुछ मामलों में अवशोषण और स्राव में भी सहायक होता है।

आवरण उपकला के प्रकार (Types of Covering Epithelium)

  1. सरलीकृत उपकला (Simple Epithelium):
    • इसमें केवल एक परत होती है और यह विभिन्न आकार की कोशिकाओं से बना हो सकता है।
    • सरलीकृत शल्की उपकला (Simple Squamous Epithelium): यह पतली और चपटी कोशिकाओं की एक परत होती है।
      • स्थान: रक्त वाहिकाओं की आंतरिक सतह, एल्वियोली (फेफड़ों की छोटी थैलियाँ), और शरीर की गुहाओं की आंतरिक सतह।
    • सरलीकृत घनाभ उपकला (Simple Cuboidal Epithelium): यह घनाकार कोशिकाओं की एक परत होती है।
      • स्थान: गुर्दे की नलिकाओं, थाइरॉइड ग्रंथि, और अंडाशय की सतह।
    • सरलीकृत स्तंभक उपकला (Simple Columnar Epithelium): यह लंबी और स्तंभ के आकार की कोशिकाओं की एक परत होती है।
      • स्थान: छोटी आंत, पेट, और गर्भाशय।
  2. स्तरीकृत उपकला (Stratified Epithelium):
    • इसमें कई परतें होती हैं और यह ऊतक अधिक सुरक्षा प्रदान करता है।
    • स्तरीकृत शल्की उपकला (Stratified Squamous Epithelium): बाहरी परत की कोशिकाएँ चपटी होती हैं।
      • स्थान: त्वचा, मुँह, ग्रसनी, और योनि।
    • स्तरीकृत घनाभ उपकला (Stratified Cuboidal Epithelium): बाहरी परत की कोशिकाएँ घनाकार होती हैं।
      • स्थान: बड़ी ग्रंथियों की नलिकाएँ (जैसे कि पसीने की ग्रंथियाँ)।
    • स्तरीकृत स्तंभक उपकला (Stratified Columnar Epithelium): बाहरी परत की कोशिकाएँ स्तंभाकार होती हैं।
      • स्थान: कंजंक्टिवा, गर्भाशय के कुछ हिस्से।
  3. शूलयुक्त उपकला (Ciliated Epithelium):
    • इस उपकला में शूल (Cilia) होती हैं, जो पदार्थों के प्रवाह में मदद करती हैं।
    • शूलयुक्त स्तंभक उपकला (Ciliated Columnar Epithelium): स्तंभाकार कोशिकाएँ जिनमें शूल होते हैं।
      • स्थान: श्वसन पथ, फैलोपियन ट्यूब।
  4. सांतरणीय उपकला (Transitional Epithelium):
    • यह ऊतक खिंचाव और संकुचन में सक्षम होता है।
    • स्थान: मूत्राशय, मूत्रवाहिनी।

आवरण उपकला के कार्य (Functions of Covering Epithelium)

  1. सुरक्षा (Protection):
    • बाहरी और आंतरिक सतहों को यांत्रिक क्षति, रोगाणुओं, और रासायनिक हानियों से बचाता है।
  2. अवशोषण (Absorption):
    • विशेषतः आंतों की सतह पर, पोषक तत्वों और अन्य आवश्यक पदार्थों का अवशोषण करता है।
  3. स्राव (Secretion):
    • ग्रंथियों की सतह पर विभिन्न पदार्थों का स्राव करता है, जैसे कि एंजाइम्स, हॉर्मोन्स।
  4. संवेदना (Sensation):
    • कुछ उपकला ऊतक संवेदी रिसेप्टर्स के रूप में कार्य करते हैं और संवेदी जानकारी का संग्रह करते हैं।

आवरण उपकला के स्थान (Locations of Covering Epithelium)

  • त्वचा (Skin): बाहरी सतह को ढकता है।
  • आंतरिक अंगों की आंतरिक सतह (Internal Linings of Organs): जैसे कि आंत, गुर्दे, और फेफड़े।
  • रक्त वाहिकाएँ (Blood Vessels): आंतरिक सतह को ढकता है।
  • ग्रंथियाँ (Glands): हार्मोन्स और अन्य पदार्थों का स्राव करता है।

निष्कर्ष

आवरण उपकला (Covering Epithelium) शरीर की बाहरी और आंतरिक सतहों को ढकने वाला महत्वपूर्ण ऊतक है। इसकी संरचना और प्रकार विविध होते हैं, जो इसे विभिन्न कार्यों को पूरा करने में सक्षम बनाते हैं। आवरण उपकला की संरचना और कार्य शरीर की सुरक्षा, अवशोषण, स्राव, और संवेदी कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।

ग्रंथीय उपकला (Glandular Epithelium)

ग्रंथीय उपकला (Glandular Epithelium) उपकला ऊतक का एक प्रकार है, जो विशेष रूप से स्राव (Secretion) के कार्य में संलग्न होता है। यह ऊतक ग्रंथियों का निर्माण करता है और विभिन्न प्रकार के रसायनों, जैसे कि हार्मोन्स, एंजाइम्स, और म्यूकस का स्राव करता है।

ग्रंथीय उपकला की संरचना (Structure of Glandular Epithelium)

  1. कोशिकाओं की संरचना: ग्रंथीय उपकला की कोशिकाएँ विशेष रूप से स्राव के कार्य के लिए अनुकूलित होती हैं। इन कोशिकाओं में स्रावी ग्रंथिकाएँ (Secretory Granules) पाई जाती हैं।
  2. ग्रंथियों का निर्माण: ये ऊतक विशेष रूप से ग्रंथियों का निर्माण करते हैं, जो स्रावी पदार्थों का उत्पादन और स्राव करती हैं।

ग्रंथीय उपकला के प्रकार (Types of Glandular Epithelium)

  1. स्राव के आधार पर:
    • अंतःस्रावी ग्रंथियाँ (Endocrine Glands): ये ग्रंथियाँ अपने स्राव (जैसे कि हार्मोन्स) सीधे रक्त प्रवाह में स्रावित करती हैं। इनमें वाहिनी (Duct) नहीं होती।
      • उदाहरण: थाइरॉइड ग्रंथि, अधिवृक्क ग्रंथि।
    • बहिःस्रावी ग्रंथियाँ (Exocrine Glands): ये ग्रंथियाँ अपने स्राव को वाहिनियों (Ducts) के माध्यम से शरीर की सतह या आंतरिक गुहाओं में स्रावित करती हैं।
      • उदाहरण: पसीने की ग्रंथियाँ, लार ग्रंथियाँ, पैंक्रियास।
  2. संरचना के आधार पर:
    • एककोशिकीय ग्रंथियाँ (Unicellular Glands): ये एक ही कोशिका से बनी होती हैं।
      • उदाहरण: गॉब्लेट कोशिकाएँ (Goblet Cells), जो म्यूकस स्रावित करती हैं।
    • बहुकोशिकीय ग्रंथियाँ (Multicellular Glands): ये कई कोशिकाओं से बनी होती हैं और अधिक जटिल संरचना होती है।
      • सरल ग्रंथियाँ (Simple Glands): जिनकी एकल वाहिनी होती है।
      • यौगिक ग्रंथियाँ (Compound Glands): जिनकी शाखित वाहिनी होती है।

ग्रंथीय उपकला के कार्य (Functions of Glandular Epithelium)

  1. स्राव (Secretion):
    • एंजाइम्स: जैसे कि लार ग्रंथियाँ एमिलेज का स्राव करती हैं।
    • हार्मोन्स: जैसे कि पैंक्रियास इंसुलिन का स्राव करता है।
    • म्यूकस: जैसे कि गॉब्लेट कोशिकाएँ म्यूकस का स्राव करती हैं।
  2. नियंत्रण और समायोजन (Regulation and Adjustment):
    • हार्मोन्स शरीर के विभिन्न कार्यों को नियंत्रित और समायोजित करते हैं।
  3. रक्षा (Protection):
    • म्यूकस रक्षा में सहायक होता है, जैसे कि श्वसन पथ में।

ग्रंथीय उपकला के स्थान (Locations of Glandular Epithelium)

  1. पैंक्रियास (Pancreas): दोनों अंतःस्रावी (इंसुलिन) और बहिःस्रावी (पाचन एंजाइम्स) कार्य करता है।
  2. लार ग्रंथियाँ (Salivary Glands): लार का स्राव करती हैं।
  3. पसीने की ग्रंथियाँ (Sweat Glands): पसीने का स्राव करती हैं।
  4. थाइरॉइड ग्रंथि (Thyroid Gland): थाइरॉइड हार्मोन्स का स्राव करती है।
  5. गॉब्लेट कोशिकाएँ (Goblet Cells): म्यूकस का स्राव करती हैं, जो आंत और श्वसन पथ में पाई जाती हैं।

निष्कर्ष

ग्रंथीय उपकला (Glandular Epithelium) शरीर में स्राव करने वाले ऊतक हैं, जो विभिन्न प्रकार के रसायनों का उत्पादन और स्राव करते हैं। ये ऊतक विभिन्न ग्रंथियों का निर्माण करते हैं और शरीर के विभिन्न कार्यों, जैसे कि पाचन, नियमन, और सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ग्रंथीय उपकला की संरचना और प्रकार इसे विभिन्न कार्यों को पूरा करने में सक्षम बनाते हैं।

संयोजी ऊतक (Connective Tissue)

संयोजी ऊतक (Connective Tissue) शरीर के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने, समर्थन देने और संरचना प्रदान करने वाला प्रमुख ऊतक है। यह ऊतक कोशिकाओं, रेशों और अंतःस्थलीय पदार्थों से मिलकर बना होता है।

संयोजी ऊतक की संरचना (Structure of Connective Tissue)

  1. कोशिकाएँ (Cells):
    • फाइब्रोब्लास्ट (Fibroblasts): ये कोशिकाएँ रेशों का निर्माण करती हैं।
    • मैक्रोफेज (Macrophages): ये रोगाणुओं और मृत कोशिकाओं को निगलती हैं।
    • एडिपोसाइट्स (Adipocytes): ये वसा का भंडारण करती हैं।
    • मास्ट कोशिकाएँ (Mast Cells): ये सूजन और एलर्जी प्रतिक्रियाओं में सहायक होती हैं।
  2. रेशे (Fibers):
    • कोलेजन रेशे (Collagen Fibers): ये मजबूत और लचीले होते हैं, जो ऊतकों को ताकत प्रदान करते हैं।
    • इलास्टिक रेशे (Elastic Fibers): ये लचीले और खिंचाव में सक्षम होते हैं।
    • रेटिक्यूलर रेशे (Reticular Fibers): ये पतले और शाखित होते हैं, जो अंगों को ढांचे प्रदान करते हैं।
  3. अंतरकोशिकीय पदार्थ (Ground Substance): यह जेल जैसा पदार्थ होता है जो कोशिकाओं और रेशों के बीच मौजूद होता है। यह पदार्थ पानी, प्रोटीन, और शर्करा से मिलकर बना होता है।

संयोजी ऊतक के प्रकार (Types of Connective Tissue)

  1. संधि ऊतक (Loose Connective Tissue):
    • एरोलर ऊतक (Areolar Tissue): यह सबसे आम संयोजी ऊतक है और अंगों के बीच रिक्त स्थान को भरता है।
      • स्थान: त्वचा के नीचे, अंगों के चारों ओर।
    • एडिपोस ऊतक (Adipose Tissue): यह वसा ऊतक है और ऊर्जा भंडारण, संरक्षण और इन्सुलेशन में मदद करता है।
      • स्थान: त्वचा के नीचे, आंतरिक अंगों के चारों ओर।
    • रेटिक्यूलर ऊतक (Reticular Tissue): यह अंगों के ढांचे का निर्माण करता है।
      • स्थान: यकृत, प्लीहा, लिम्फ नोड्स।
  2. घना संयोजी ऊतक (Dense Connective Tissue):
    • घना नियमित संयोजी ऊतक (Dense Regular Connective Tissue): इसमें रेशे एक समान दिशा में व्यवस्थित होते हैं।
      • स्थान: कण्डरा (Tendons), स्नायुबंधन (Ligaments)।
    • घना अनियमित संयोजी ऊतक (Dense Irregular Connective Tissue): इसमें रेशे अनियमित रूप से व्यवस्थित होते हैं।
      • स्थान: त्वचा की गहरी परत, अंगों का कवरिंग।
  3. विशिष्ट संयोजी ऊतक (Specialized Connective Tissue):
    • हड्डी ऊतक (Bone Tissue): यह मजबूत और कठोर ऊतक है, जो शरीर को संरचना और समर्थन प्रदान करता है।
      • स्थान: सभी हड्डियाँ।
    • उपास्थि ऊतक (Cartilage Tissue): यह लचीला और समर्थनकारी ऊतक है।
      • स्थान: कान, नाक, जोड़ों का कवरिंग।
    • रक्त ऊतक (Blood Tissue): यह तरल ऊतक है, जो पोषक तत्वों, गैसों, और अपशिष्ट पदार्थों का परिवहन करता है।
      • स्थान: रक्त वाहिकाएँ।

संयोजी ऊतक के कार्य (Functions of Connective Tissue)

  1. समर्थन और संरचना (Support and Structure): हड्डी और उपास्थि ऊतक शरीर को समर्थन और संरचना प्रदान करते हैं।
  2. परिवहन (Transport): रक्त ऊतक पोषक तत्वों, गैसों, और अपशिष्ट पदार्थों का परिवहन करता है।
  3. ऊर्जा भंडारण (Energy Storage): एडिपोस ऊतक ऊर्जा को वसा के रूप में भंडारित करता है।
  4. संरक्षण (Protection): संयोजी ऊतक आंतरिक अंगों की सुरक्षा में सहायक होते हैं।
  5. संयोजन (Connection): संधि ऊतक अंगों और ऊतकों को जोड़ने में मदद करता है।

निष्कर्ष

संयोजी ऊतक (Connective Tissue) शरीर के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने, समर्थन देने और संरचना प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण ऊतक है। इसकी संरचना और प्रकार विविध होते हैं, जो इसे विभिन्न कार्यों को पूरा करने में सक्षम बनाते हैं। संयोजी ऊतक की संरचना और कार्य शरीर की संरचना, समर्थन, परिवहन, ऊर्जा भंडारण, संरक्षण, और संयोजन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।

सरल ढीला संयोजी ऊतक (Simple Loose Connective Tissue)

सरल ढीला संयोजी ऊतक (Simple Loose Connective Tissue) शरीर में सबसे व्यापक रूप से पाया जाने वाला संयोजी ऊतक है। यह ऊतक अंगों और ऊतकों को जोड़ने और उनके बीच रिक्त स्थान को भरने का कार्य करता है। इसमें कोशिकाओं, रेशों और अंतःस्थलीय पदार्थों की ढीली व्यवस्था होती है, जो इसे लचीला और विभिन्न प्रकार के दबाव को सहन करने योग्य बनाती है।

सरल ढीले संयोजी ऊतक के प्रकार (Types of Simple Loose Connective Tissue)

  1. एरोलर ऊतक (Areolar Tissue):
    • संरचना: इसमें फाइब्रोब्लास्ट, मैक्रोफेज, मास्ट कोशिकाएँ और विभिन्न प्रकार के रेशे (कोलेजन, इलास्टिक और रेटिक्यूलर) होते हैं।
    • स्थान: त्वचा के नीचे, अंगों के चारों ओर, रक्त वाहिकाओं और नसों के आसपास।
    • कार्य: यह ऊतक अंगों को जोड़ता है, उन्हें लचीलापन और सहारा देता है, और संक्रमण से रक्षा करता है।
  2. एडिपोस ऊतक (Adipose Tissue):
    • संरचना: इसमें मुख्यतः एडिपोसाइट्स होते हैं जो वसा का भंडारण करते हैं।
    • स्थान: त्वचा के नीचे, आंतरिक अंगों के आसपास, हड्डियों के भीतर।
    • कार्य: यह ऊतक ऊर्जा का भंडारण करता है, शरीर को इन्सुलेशन प्रदान करता है और अंगों को संरक्षण देता है।
  3. रेटिक्यूलर ऊतक (Reticular Tissue):
    • संरचना: इसमें रेटिक्यूलर कोशिकाएँ और रेटिक्यूलर रेशे होते हैं।
    • स्थान: यकृत, प्लीहा, लिम्फ नोड्स, और अस्थि मज्जा।
    • कार्य: यह ऊतक अंगों का ढांचा प्रदान करता है और प्रतिरक्षा प्रणाली में सहायक होता है।

सरल ढीले संयोजी ऊतक के कार्य (Functions of Simple Loose Connective Tissue)

  1. जोड़ने का कार्य (Binding Function): यह ऊतक अंगों और ऊतकों को जोड़ने में मदद करता है, जिससे शरीर की संरचना स्थिर रहती है।
  2. समर्थन (Support): यह ऊतक अंगों को सहारा देता है और उन्हें उचित स्थान पर बनाए रखता है।
  3. पोषण और अपशिष्ट निपटान (Nutrition and Waste Disposal): रक्त वाहिकाओं के माध्यम से पोषक तत्वों और अपशिष्ट पदार्थों का आदान-प्रदान करता है।
  4. संरक्षण (Protection): यह ऊतक अंगों को यांत्रिक क्षति से बचाता है और संक्रमण से रक्षा करता है।
  5. इन्सुलेशन (Insulation): एडिपोस ऊतक शरीर को इन्सुलेशन प्रदान करता है, जिससे तापमान नियंत्रित रहता है।

सरल ढीले संयोजी ऊतक की संरचना (Structure of Simple Loose Connective Tissue)

  1. कोशिकाएँ (Cells):
    • फाइब्रोब्लास्ट (Fibroblasts): ये कोशिकाएँ रेशों का निर्माण करती हैं।
    • मैक्रोफेज (Macrophages): ये रोगाणुओं और मृत कोशिकाओं को निगलती हैं।
    • मास्ट कोशिकाएँ (Mast Cells): ये सूजन और एलर्जी प्रतिक्रियाओं में सहायक होती हैं।
    • एडिपोसाइट्स (Adipocytes): ये वसा का भंडारण करती हैं (एडिपोस ऊतक में)।
  2. रेशे (Fibers):
    • कोलेजन रेशे (Collagen Fibers): ये मजबूत और लचीले होते हैं, जो ऊतकों को ताकत प्रदान करते हैं।
    • इलास्टिक रेशे (Elastic Fibers): ये लचीले और खिंचाव में सक्षम होते हैं।
    • रेटिक्यूलर रेशे (Reticular Fibers): ये पतले और शाखित होते हैं, जो अंगों को ढांचे प्रदान करते हैं।
  3. अंतरकोशिकीय पदार्थ (Ground Substance): यह जेल जैसा पदार्थ होता है जो कोशिकाओं और रेशों के बीच मौजूद होता है। यह पदार्थ पानी, प्रोटीन, और शर्करा से मिलकर बना होता है और ऊतक को लचीला बनाता है।

निष्कर्ष

सरल ढीला संयोजी ऊतक (Simple Loose Connective Tissue) शरीर में व्यापक रूप से पाया जाने वाला और विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा करने वाला ऊतक है। यह ऊतक अंगों और ऊतकों को जोड़ने, उन्हें समर्थन देने, पोषण प्रदान करने, और संरक्षण देने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी संरचना और प्रकार इसे विभिन्न कार्यों को पूरा करने में सक्षम बनाते हैं, जिससे शरीर की संरचना और कार्यप्रणाली सुव्यवस्थित बनी रहती है।

घना रेशेदार संयोजी ऊतक (Dense Fibrous Connective Tissue)

घना रेशेदार संयोजी ऊतक (Dense Fibrous Connective Tissue) शरीर का एक प्रकार का संयोजी ऊतक है जो मुख्य रूप से मजबूत कोलेजन रेशों से मिलकर बना होता है। यह ऊतक अंगों और ऊतकों को मजबूती और समर्थन प्रदान करता है।

घना रेशेदार संयोजी ऊतक के प्रकार (Types of Dense Fibrous Connective Tissue)

  1. घना नियमित संयोजी ऊतक (Dense Regular Connective Tissue):
    • संरचना: इसमें कोलेजन रेशे एक समान दिशा में व्यवस्थित होते हैं, जिससे ऊतक बहुत ही मजबूत और खिंचाव के प्रति सहनशील होता है।
    • स्थान: कण्डरा (Tendons) जो मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ते हैं, और स्नायुबंधन (Ligaments) जो हड्डियों को हड्डियों से जोड़ते हैं।
    • कार्य: यह ऊतक मांसपेशियों और हड्डियों को स्थिरता और समर्थन प्रदान करता है।
  2. घना अनियमित संयोजी ऊतक (Dense Irregular Connective Tissue):
    • संरचना: इसमें कोलेजन रेशे अनियमित रूप से व्यवस्थित होते हैं, जिससे यह ऊतक विभिन्न दिशाओं में यांत्रिक तनाव का सामना कर सकता है।
    • स्थान: त्वचा की गहरी परत (डर्मिस), अंगों का बाहरी आवरण (कैप्सूल), और कुछ आंतरिक अंगों के चारों ओर।
    • कार्य: यह ऊतक अंगों को विभिन्न दिशाओं से आने वाले तनाव से बचाता है और लचीलापन प्रदान करता है।

घना रेशेदार संयोजी ऊतक के कार्य (Functions of Dense Fibrous Connective Tissue)

  1. मजबूती और स्थिरता (Strength and Stability):
    • कण्डरा और स्नायुबंधन: कण्डरा मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ता है और संकुचन के दौरान बल को स्थानांतरित करता है, जबकि स्नायुबंधन हड्डियों को जोड़कर जोड़ों को स्थिरता प्रदान करता है।
  2. संरक्षण (Protection):
    • त्वचा और अंगों का बाहरी आवरण: घना अनियमित संयोजी ऊतक त्वचा और अंगों को बाहरी यांत्रिक तनाव से बचाता है।
  3. समर्थन (Support):
    • अंगों का बाहरी आवरण: यह ऊतक अंगों को उनके उचित स्थान पर बनाए रखने और आंतरिक संरचना को समर्थन देने में मदद करता है।

घना रेशेदार संयोजी ऊतक की संरचना (Structure of Dense Fibrous Connective Tissue)

  1. कोशिकाएँ (Cells):
    • फाइब्रोब्लास्ट (Fibroblasts): ये कोशिकाएँ कोलेजन रेशों का निर्माण करती हैं और ऊतक की मरम्मत और रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  2. रेशे (Fibers):
    • कोलेजन रेशे (Collagen Fibers): ये रेशे बहुत मजबूत और लचीले होते हैं, जो ऊतक को मजबूती और सहनशीलता प्रदान करते हैं।
  3. अंतरकोशिकीय पदार्थ (Ground Substance):
    • यह जेल जैसा पदार्थ होता है जो कोशिकाओं और रेशों के बीच मौजूद होता है। यह ऊतक को लचीला बनाता है और विभिन्न प्रकार के रासायनिक तत्वों का आदान-प्रदान करने में मदद करता है।

निष्कर्ष

घना रेशेदार संयोजी ऊतक (Dense Fibrous Connective Tissue) शरीर का महत्वपूर्ण ऊतक है जो विभिन्न अंगों और ऊतकों को मजबूती, स्थिरता, और समर्थन प्रदान करता है। इसके दो प्रकार होते हैं: घना नियमित और घना अनियमित संयोजी ऊतक, जो विभिन्न प्रकार के यांत्रिक तनाव का सामना कर सकते हैं और शरीर की संरचना और कार्यप्रणाली को बनाए रखने में सहायक होते हैं। इसकी संरचना, जिसमें मजबूत कोलेजन रेशे और फाइब्रोब्लास्ट कोशिकाएँ शामिल हैं, इसे विभिन्न कार्यों को पूरा करने में सक्षम बनाती है।

विशिष्ट संयोजी ऊतक (Specialized Connective Tissue)

विशिष्ट संयोजी ऊतक (Specialized Connective Tissue) शरीर में विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा करने के लिए विशेषीकृत होते हैं। इन ऊतकों में हड्डी ऊतक, उपास्थि ऊतक, रक्त ऊतक और लसीका ऊतक शामिल हैं। ये ऊतक संरचनात्मक समर्थन, संरक्षण, परिवहन और प्रतिरक्षा जैसी भूमिकाएँ निभाते हैं।

हड्डी ऊतक (Bone Tissue)

  1. संरचना (Structure):
    • हड्डी ऊतक कठोर और मजबूत होता है, जो मुख्यतः कैल्शियम फॉस्फेट और कोलेजन से मिलकर बना होता है।
    • इसमें दो प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं: ऑस्टियोब्लास्ट (जो नई हड्डी बनाते हैं) और ऑस्टियोसाइट्स (जो परिपक्व हड्डी कोशिकाएँ हैं)।
    • हड्डियों के अंदर अस्थि मज्जा (Bone Marrow) होता है, जो रक्त कोशिकाओं का उत्पादन करता है।
  2. स्थान (Location):
    • सभी हड्डियों में पाया जाता है।
  3. कार्य (Functions):
    • संरचनात्मक समर्थन प्रदान करता है।
    • अंगों की रक्षा करता है।
    • कैल्शियम और फॉस्फेट का भंडारण करता है।
    • रक्त कोशिकाओं का उत्पादन करता है।

उपास्थि ऊतक (Cartilage Tissue)

  1. संरचना (Structure):
    • उपास्थि ऊतक लचीला और मजबूत होता है।
    • इसमें कोलेजन और इलास्टिन रेशे होते हैं।
    • उपास्थि कोशिकाएँ (Chondrocytes) इन रेशों के बीच स्थित होती हैं।
  2. स्थान (Location):
    • कान, नाक, श्वासनली, जोड़ों के अंत में।
  3. कार्य (Functions):
    • लचीलापन और समर्थन प्रदान करता है।
    • जोड़ों में घर्षण को कम करता है।
    • श्वासनली और कान को संरचना और लचीलापन प्रदान करता है।

रक्त ऊतक (Blood Tissue)

  1. संरचना (Structure):
    • रक्त ऊतक तरल होता है और इसमें लाल रक्त कोशिकाएँ (RBCs), सफेद रक्त कोशिकाएँ (WBCs), प्लेटलेट्स और प्लाज्मा शामिल होते हैं।
  2. स्थान (Location):
    • रक्त वाहिकाओं में पाया जाता है।
  3. कार्य (Functions):
    • ऑक्सीजन और पोषक तत्वों का परिवहन करता है।
    • अपशिष्ट पदार्थों का निष्कासन करता है।
    • प्रतिरक्षा प्रणाली का हिस्सा होता है और संक्रमण से रक्षा करता है।
    • थक्का जमाने में मदद करता है।

लसीका ऊतक (Lymphatic Tissue)

  1. संरचना (Structure):
    • लसीका ऊतक में लसीका द्रव, लसीका वाहिकाएँ और लसीका नोड्स होते हैं।
  2. स्थान (Location):
    • लसीका नोड्स, प्लीहा, और थाइमस में पाया जाता है।
  3. कार्य (Functions):
    • अतिरिक्त द्रव को वापस रक्त में लाता है।
    • संक्रमण से लड़ने में मदद करता है।
    • प्रतिरक्षा प्रणाली को समर्थन देता है।

निष्कर्ष

विशिष्ट संयोजी ऊतक (Specialized Connective Tissue) शरीर में विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा करने के लिए विशेषीकृत होते हैं। हड्डी ऊतक संरचनात्मक समर्थन और संरक्षण प्रदान करता है, उपास्थि ऊतक लचीलापन और समर्थन प्रदान करता है, रक्त ऊतक परिवहन और प्रतिरक्षा में सहायक होता है, और लसीका ऊतक अतिरिक्त द्रव को वापस रक्त में लाने और प्रतिरक्षा प्रणाली को समर्थन देने में मदद करता है। इन ऊतकों की विशेष संरचना और कार्य उन्हें विभिन्न प्रकार की भूमिकाएँ निभाने में सक्षम बनाते हैं।

कंकालीय संयोजी ऊतक (Skeletal Connective Tissue)

कंकालीय संयोजी ऊतक (Skeletal Connective Tissue) शरीर का एक प्रमुख ऊतक है, जो हड्डियों और उपास्थियों के रूप में पाया जाता है। यह ऊतक शरीर को संरचनात्मक समर्थन, गतिशीलता और सुरक्षा प्रदान करता है। कंकालीय संयोजी ऊतक मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं: हड्डी ऊतक (Bone Tissue) और उपास्थि ऊतक (Cartilage Tissue)।

हड्डी ऊतक (Bone Tissue)

  1. संरचना (Structure):
    • हड्डी ऊतक मुख्यतः कैल्शियम फॉस्फेट और कोलेजन से मिलकर बना होता है, जो इसे कठोरता और ताकत प्रदान करते हैं।
    • इसमें दो प्रमुख प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं:
      • ऑस्टियोब्लास्ट (Osteoblasts): ये नई हड्डी का निर्माण करती हैं।
      • ऑस्टियोसाइट्स (Osteocytes): ये परिपक्व हड्डी कोशिकाएँ हैं जो हड्डी के रखरखाव में मदद करती हैं।
    • हड्डी के अंदर अस्थि मज्जा (Bone Marrow) होता है, जो रक्त कोशिकाओं का उत्पादन करता है।
  2. स्थान (Location):
    • सभी हड्डियों में पाया जाता है।
  3. कार्य (Functions):
    • संरचनात्मक समर्थन (Structural Support): हड्डियाँ शरीर की संरचना और आकार बनाए रखने में मदद करती हैं।
    • संरक्षण (Protection): महत्वपूर्ण अंगों जैसे मस्तिष्क, हृदय और फेफड़े को सुरक्षा प्रदान करती हैं।
    • गति (Movement): मांसपेशियाँ हड्डियों से जुड़ी होती हैं, जिससे शरीर की गति संभव होती है।
    • खनिज भंडारण (Mineral Storage): हड्डियाँ कैल्शियम और फॉस्फोरस का भंडारण करती हैं।
    • रक्त निर्माण (Blood Cell Production): अस्थि मज्जा रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है।

उपास्थि ऊतक (Cartilage Tissue)

  1. संरचना (Structure):
    • उपास्थि ऊतक लचीला और मजबूत होता है।
    • इसमें चोंड्रोसाइट्स (Chondrocytes) नामक कोशिकाएँ होती हैं, जो एक जेल जैसे मैट्रिक्स में स्थित होती हैं।
    • उपास्थि में मुख्यतः तीन प्रकार के रेशे होते हैं:
      • हायलिन उपास्थि (Hyaline Cartilage): सबसे सामान्य प्रकार का उपास्थि, जो चिकना और कांच जैसा होता है।
      • इलास्टिक उपास्थि (Elastic Cartilage): अधिक लचीला होता है, जिसमें इलास्टिन रेशे होते हैं।
      • फाइब्रोकार्टिलेज (Fibrocartilage): मजबूत और कठोर होता है, जिसमें कोलेजन रेशे होते हैं।
  2. स्थान (Location):
    • हायलिन उपास्थि: जोड़ों के सिरे, नाक, श्वासनली, और भ्रूणीय कंकाल।
    • इलास्टिक उपास्थि: कान का बाहरी हिस्सा, एपिग्लॉटिस।
    • फाइब्रोकार्टिलेज: इंटरवर्टेब्रल डिस्क, प्यूबिक सिम्फिसिस।
  3. कार्य (Functions):
    • सपोर्ट और लचीलापन (Support and Flexibility): अंगों को लचीलापन और समर्थन प्रदान करता है।
    • जोड़ों में घर्षण को कम करना (Reducing Friction in Joints): हायलिन उपास्थि जोड़ों में चिकनाई प्रदान करके घर्षण को कम करता है।
    • संरचना प्रदान करना (Providing Structure): इलास्टिक उपास्थि कान और नाक को आकार और संरचना प्रदान करता है।
    • झटके को अवशोषित करना (Absorbing Shock): फाइब्रोकार्टिलेज वजन और झटकों को सहन करने में मदद करता है।

निष्कर्ष

कंकालीय संयोजी ऊतक (Skeletal Connective Tissue) शरीर का महत्वपूर्ण ऊतक है, जो हड्डियों और उपास्थियों के रूप में विभिन्न प्रकार के कार्य करता है। यह ऊतक शरीर को संरचनात्मक समर्थन, गतिशीलता, सुरक्षा, और लचीलापन प्रदान करता है। हड्डी ऊतक कठोरता और ताकत के लिए जाना जाता है, जबकि उपास्थि ऊतक लचीलेपन और समर्थन के लिए महत्वपूर्ण होता है। इन ऊतकों की विशिष्ट संरचना और कार्य उन्हें शरीर की संरचना और कार्यप्रणाली को बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं।

संवहन या तरल ऊतक(Vascular or Fluid Tissue)

जन्तु के शरीर में रुधिर (blood) और लसिका दोनों संवहन या तरल ऊतक हैं क्योंकि ये शरीर में सदैव बहते रहते हैं। इनमें मैट्रिक्स द्रव अवस्था (myofibrils) पाया जात में होता है जिसे प्लाज्मा (plasma) कहते हैं।परन्तु इसमें असंख्य जीवित कोशिकायें (रुधिर कणिकायें) भ्रमण करती हैं। अन्य ऊतकों की भांति इसके प्लाज्मा में रेशे (fibres) नहीं पाये जाते हैं। इसके अतिरिक्त प्लाज्मा की कोशिकायें स्वयं प्लाज्मा (मैट्रिक्स) का स्राव नहीं करती हैं। संवहन ऊतक शरीर में विभिन्न पदार्थ को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने का कार्य करते हैं। इसका विस्तृत वर्णन ‘परिसंचरण तंत्र’ नामक प्रभाग में किया गया है। रक्त की आनुवांशिकी एवं व्याधियों का वर्णन ‘मानव आनुवांशिकी’ किया गया है।

मांसपेशीय ऊतक (Muscular Tissue)

मांसपेशीय ऊतक (Muscular Tissue) शरीर में विभिन्न प्रकार की गतियों और कार्यों के लिए जिम्मेदार होता है। यह ऊतक संकुचन और शिथिलन (contraction and relaxation) के माध्यम से काम करता है। मांसपेशीय ऊतक को मुख्यतः तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है: अस्थि मांसपेशी ऊतक (Skeletal Muscle Tissue), हृदय मांसपेशी ऊतक (Cardiac Muscle Tissue), और चिकनी मांसपेशी ऊतक (Smooth Muscle Tissue)।

अस्थि मांसपेशी ऊतक (Skeletal Muscle Tissue)

  1. संरचना (Structure):
    • अस्थि मांसपेशी ऊतक लम्बी और सिलंडर आकार की होती है।
    • इसमें अनेक केंद्रक (nuclei) होते हैं जो किनारे पर स्थित होते हैं।
    • इसमें धारीदार (striated) पैटर्न होते हैं जो संकुचन के लिए जिम्मेदार होते हैं।
  2. स्थान (Location):
    • यह ऊतक हड्डियों से जुड़ा होता है और कंकाल प्रणाली का हिस्सा होता है।
  3. कार्य (Function):
    • यह ऊतक स्वैच्छिक गति (voluntary movement) के लिए जिम्मेदार होता है, जैसे चलना, दौड़ना, और उठाना।

हृदय मांसपेशी ऊतक (Cardiac Muscle Tissue)

  1. संरचना (Structure):
    • हृदय मांसपेशी ऊतक शाखान्वित (branched) होती है और इसके प्रत्येक कोशिका में एक या दो केंद्रक होते हैं।
    • इसमें भी धारीदार (striated) पैटर्न होता है, लेकिन यह स्वैच्छिक नहीं होता।
    • इसमें इंटरकालेटेड डिस्क (intercalated discs) होते हैं जो कोशिकाओं को जोड़ते हैं और संकुचन को समन्वित करते हैं।
  2. स्थान (Location):
    • यह ऊतक हृदय में पाया जाता है।
  3. कार्य (Function):
    • यह ऊतक अनैच्छिक संकुचन (involuntary contraction) के माध्यम से रक्त को पंप करने के लिए जिम्मेदार होता है।

चिकनी मांसपेशी ऊतक (Smooth Muscle Tissue)

  1. संरचना (Structure):
    • चिकनी मांसपेशी ऊतक धारीदार नहीं होती और प्रत्येक कोशिका में एक केंद्रक होता है।
    • यह ऊतक आकार में छोटी और धागे जैसी होती है।
  2. स्थान (Location):
    • यह ऊतक आंतरिक अंगों की दीवारों में पाया जाता है, जैसे आंत, पेट, रक्त वाहिकाएँ, और मूत्राशय।
  3. कार्य (Function):
    • यह ऊतक अनैच्छिक गति (involuntary movement) के लिए जिम्मेदार होता है, जैसे भोजन का पाचन, रक्त वाहिकाओं का संकुचन, और मूत्राशय का खाली होना।

निष्कर्ष

मांसपेशीय ऊतक (Muscular Tissue) शरीर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अस्थि मांसपेशी ऊतक स्वैच्छिक गतियों के लिए जिम्मेदार होता है, हृदय मांसपेशी ऊतक रक्त पंप करने के लिए और चिकनी मांसपेशी ऊतक आंतरिक अंगों की अनैच्छिक गतियों के लिए जिम्मेदार होते हैं। इन ऊतकों की विशिष्ट संरचना और कार्य उन्हें शरीर की विभिन्न गतियों और कार्यों को पूर्ण करने में सक्षम बनाते हैं।

तंत्रिका ऊतक (Nerve Tissue)

तंत्रिका ऊतक (Nerve Tissue) शरीर के संचार प्रणाली का एक प्रमुख हिस्सा होता है, जो सूचना का प्रसारण और प्रसंस्करण करने के लिए जिम्मेदार होता है। यह ऊतक न्यूरॉन्स (Neurons) और न्यूरोग्लिया (Neuroglia) नामक कोशिकाओं से मिलकर बना होता है।

तंत्रिका ऊतक की संरचना (Structure of Nerve Tissue)

  1. न्यूरॉन्स (Neurons):

a.सामान्य संरचना (General Structure):
b.कोशिका शरीर (Cell Body): इसमें नाभिक (Nucleus) और अन्य कोशिकीय अंगक (Organelles) होते हैं।
c.डेंड्राइट्स (Dendrites): ये शाखित संरचनाएँ होती हैं जो अन्य न्यूरॉन्स से संकेत प्राप्त करती हैं।
d.अक्षतंतु (Axon): यह लंबी पतली संरचना होती है जो संकेतों को अन्य न्यूरॉन्स, मांसपेशियों या ग्रंथियों तक ले जाती है।
e.सिनैप्स (Synapse): यह वह स्थान होता है जहाँ दो न्यूरॉन्स आपस में संचार करते हैं।

प्रकार (Types):
a.संवेदी न्यूरॉन्स (Sensory Neurons): ये बाहरी और आंतरिक उत्तेजनाओं को केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) तक पहुँचाते हैं।
b.मोटर न्यूरॉन्स (Motor Neurons): ये केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से मांसपेशियों और ग्रंथियों तक संकेत पहुँचाते हैं।
c.इंटरन्यूरॉन्स (Interneurons): ये संवेदी और मोटर न्यूरॉन्स के बीच सूचना का आदान-प्रदान करते हैं।

  1. न्यूरोग्लिया (Neuroglia):

a.संरचना और कार्य (Structure and Function):
b.एस्ट्रोसाइट्स (Astrocytes): ये कोशिकाएँ रक्त-मस्तिष्क बाधा (Blood-Brain Barrier) बनाए रखने और तंत्रिका ऊतक की मरम्मत में मदद करती हैं।
c.ओलिगोडेंड्रोसाइट्स (Oligodendrocytes) और श्वान कोशिकाएँ (Schwann Cells): ये कोशिकाएँ माइलिन (Myelin) का निर्माण करती हैं, जो अक्षतंतु को ढक कर संचार की गति को बढ़ाता है।
d.माइक्रोग्लिया (Microglia): ये प्रतिरक्षा कोशिकाएँ होती हैं जो मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की रक्षा करती हैं।
e.एपेंडाइमल कोशिकाएँ (Ependymal Cells): ये मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के गह्वर (Cavities) को लाइन करती हैं और मस्तिष्कमेरु द्रव (Cerebrospinal Fluid) का उत्पादन करती हैं।

तंत्रिका ऊतक के कार्य (Functions of Nerve Tissue)

  1. संवेदी कार्य (Sensory Function):
    a.तंत्रिका ऊतक बाहरी और आंतरिक पर्यावरण से जानकारी प्राप्त करता है और इसे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक पहुँचाता है।
  2. 2.प्रसंस्करण और व्याख्या (Processing and Interpretation):
    a.केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में, सूचना को प्रसंस्कृत और व्याख्यायित किया जाता है, जिससे निर्णय और प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न होती हैं।
  3. 3.मोटर कार्य (Motor Function):
    a.केंद्रीय तंत्रिका तंत्र मांसपेशियों और ग्रंथियों को संकेत भेजता है, जिससे विभिन्न प्रकार की शारीरिक प्रतिक्रियाएँ होती हैं।
  4. 4.होमियोस्टेसिस का नियंत्रण (Control of Homeostasis):
    तंत्रिका ऊतक विभिन्न शारीरिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है, जैसे शरीर का तापमान, पाचन, और श्वसन।
  5. निष्कर्ष
    तंत्रिका ऊतक (Nerve Tissue) शरीर की संचार प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो संवेदी जानकारी को प्राप्त, प्रसंस्कृत और प्रसारित करता है। न्यूरॉन्स और न्यूरोग्लिया इस ऊतक के मुख्य घटक होते हैं, जो मिलकर सूचना का त्वरित और सटीक आदान-प्रदान करते हैं। तंत्रिका ऊतक के कार्य शरीर की विभिन्न प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने और समन्वित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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